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जीवन चक्र

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22 -Oct-2015 Sunny Kapoor Life Poem 0 Comments  2,540 Views
Sunny Kapoor

रेगिस्तान में जल मरीचिका का अहसास,
जैसे जीवन के हर पल में जीने की आस,
कोई प्यासा कैसे रेगिस्तान पार कर जाये,
बेचारा भेड़ जीवन जंगल में सियार बन जाये,
दूर तलक गगन को चूम रही जो धरती,
इंसानी जीवन में लालच मटकी न भरती,
आग सी तपती रेत पग पग जला देगी,
जीवन की ज्वाला मानुष जमीर गला देगी,
रेतीले तूफ़ान में कण कण जुड़ जाएगा,
आडम्बर इस जीवन का इक दिन उड़ जाएगा,
जो आएगा तूफ़ान के बाद वो शांत दौर,
जीवन की बरसात में नाचेगा फिर मोर,
रेत का आगोश कभी सख्त कभी लचर,
जीवन के पहिये का भी ऐसा ही चक्र।।



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