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*'जीवन का सच'*

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07 -Jul-2021 Dimpy Rat Sad Poems 0 Comments  136 Views
*'जीवन का सच'*

दिल में आज बेचैनी सी क्यों !
फिज़ाओ में ये मायूसी सी क्यों,
आँखों में ये नमी सी क्यों...
आज लगता हैं संसार विराना हैं,
ना कोई अपना ना कोई सहारा हैं...
दिल कचोट रहा हैं बार-बार, किसके लिए जियूँ !
झूठी हैं दुनिया, भ्रम में जा रहा जीवन सारा हैं...
चारो और हैं अनगिनत चेहरे,
पर ना जाने कौन अपना कौन पराया हैं...
झूठे हैं सारे रिश्ते, झूठे हैं सारे एहसास
सिर्फ एक सच हैं और वो हैं मौत का साथ...
Written by
Dimpy Rathore



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