Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

जीवन में ही सहे जाते हैं ।

0
24 -Mar-2022 Buddha Prakash Life Poem 0 Comments  397 Views
जीवन में ही सहे जाते हैं ।

यूंँ ही क्यों विचलित हो,
परेशान से इतने हो,
ये पल तो आते जाते हैं,
इसी जीवन में ही सहे जाते हैं ।....(१)

दुख से बचा न कोई है,
दर्द सभी ने गुजारा है,
यूँ दुःख-दर्द तो आते जाते हैं,
इसी जीवन में ही सहे जाते हैं ।....(२)

हैरान होने जैसा है नहीं,
दुनिया की यह कोई नई बात नहीं,
चोट जिस्म में लगते रहते हैं ,
इसी जीवन में ही सहे जाते हैं ।....(३)

हार कोई अपमान नहीं ,
संघर्ष की एक कहानी ही है ,
ये जीत-हार तो लगे रहते हैं ,
इसी जीवन में ही सहे जाते हैं ।....(४)

जीवन में ही सहे जाते हैं ।


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017