Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

जीवन सारांश...

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विनोद सिन्हा-

जीवन सारांश...

मुझे सारा नहीं चाहिए
सारे का सारांश चाहिए।
जो कर्त्तव्य है
उसे करना चाहता हूं।
मैं अपव्यय खुद का
चाहता नहीं करना
सोच समझ कर,
श्रेष्ठ कुछ के लिए व्यय
होना चाहता हूं।
मैं ऐसा जीवन चाहता हूँ

यह सब अब भी चाहता हूं
जब कुछ भी चाहने के लिए
बहुत कम समय बचा है।
'कम समय' तब भी था
जब सोचा था कि
अभी बहुत समय है।
अब भी बहुत समय है
अगर बहुत को न चाहें।
तो शायद कठिन न हो
यह जीवन और
"ये जीवन" की राहें.।

बीते जीवन को सोचते हुए
कभी-कभी लगता कि
अब तक तो किसी तरह,
जैसे-तैसे,'पास' होता चला आया हूं।
असली 'इम्तिहान' तो अब है,
जब मृत्यु नजदीक खड़ी है
और परीक्षक वे हैं,
जिन्हें अपने तमाम सवालों का
मुझसे केवल एक
'अन्तिम' उत्तर चाहिए।
मेरी व्यग्रता, मेरा अधैर्य,
उसी 'अन्तिम' की प्रतीक्षा है।
मुझे सारा नहीं चाहिए
सारे का सारांश चाहिए।

विनोद सिन्हा "सुदामा"



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