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Kaaledhan ke jabade me lagaan

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13 -Nov-2016 Hanu Sanchoriya Social Issues Poems 0 Comments  571 Views
Kaaledhan ke jabade me lagaan

माना कि यह कदम है अच्छा और बहुत ही सच्चा है ।
देश हितैषी नीयत है सच्ची कहता बच्चा बच्चा है ।
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माना कालेधन के जबड़े मे लगाम लग जायेगी ।
माना भ्रष्टाचार थमेगा ,नयी राह बन जायेगी ।
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माना पाकिस्तान खोपड़ी धुन धुन करके पीटेगा ।
माना दुश्मन दाउद गर्दन फाड़ फाड़ कर चीखेगा ।
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माना हर काला धन धारी ऑख से ऑख चुरायेगा ।
माना अपने नोट बचाने की हर जतन लगायेगा ।
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माना नयी सर्जिकल से अब अर्थ सुधार हो जायेगा ।
माना बन्द तिजोरी वाला ताला अब खुल जायेगा ।
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माना कलई खुल जायेगी पर्दाफाश जरूरी था ।
माना धन्नासेंठो को यह च्वनप्राश जरूरी था ।
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माना सब कुछ देश के हित मे यह अादेश सार्थक है ।
लेकिन जनता परेशान है कुछ संदेश निर्थक है ।
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आम आदमी घुटा जा रहा हाय राम बर्बादी है ।
उससे पूछो दर्द कि जिसके घर बेटी की शादी है।
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चार दिनों से लाइन लगाये ए़टीएम भी बन्द पड़े ।
दो हजार की नोट गुलाबी धन्धे सारे मन्द पड़े ।
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चार दिनो से लगातार लोगो का बैठा भट्ठा है ।
दो हजार की नोट जेब मे पर मिलता न छुट्टा है ।
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बीमारों की रोगो से भी अधिक बढ़ी बीमारी है।
चेहरों पर याचना भाव है महागजब लाचारी है ।
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अस्त व्यस्त हो चुका देश है जमा जमा की बातें है।
डाकघरों मे नही निकासी भरे जा रहें खातें है ।
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आम आदमी जगते जगते सुबह लाइन लग जाता है।
धक्का मुक्की ठेल ठालकर तब जाकर धन पाता है ।
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बैंक कर्मचारी अधिकारी पता नही कब सोते है ।
अच्छा भला बुरा सब सुनकर किन्तु न संयम खोते है
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चार दिनो से अजब तमाशा गजब का पीड़ादायक है ।
लेकिन इतना परमसत्य है राष्ट्र हेतु सुखदायक है ।
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सीमा पर खड़ा जवान हमारा सारे दुख सह लेता है ।
खुली हवा की सांसे तब वह सारे देश को देता है ।
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हफ्ते भर का कष्ट है जैसे तैसे सब सह जाना है ।
मोदी जी के स्वर मे मिलकर वन्देमातरम् गाना है ।



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