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कड़वा सच

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08 -Dec-2018 Abbas Bohari Family Poems 0 Comments  179 Views
Abbas Bohari

पिता करता जद्दोजहद माल जुट़ाने
पर कर नही पाये इकठ्ठा ख़ज़ाने
जरूरते पूरी करते छूट जाये पसीने
करके सारे कर्तव्य पूरे जाए गंगा नहाने
सोच रहा बच्चोंके राजमें गाये तराने

अरसे से कहते आये बड़े बुजुर्ग सयाने
औलाद को खिलाओ भले मोती के दाने
मगर रखो तलवारकी धार किसी बहाने
जान रखो जब लग जायेंगे अपना कमाने
बना देंगे बुढ़ापेमें माँ बाप को पलमें बेगाने

है जीवन का कड़वा सच लगे हम भूलाने
लिए झूटी उम्मीदे चले कोरा चेक भुनाने
बो कर बबूल देखे आम के सपन सुहाने
निकल गया वक़्त अब लगे लकीर पीटने
जग बैरी खड़ा अब्बास की खिल्ली उड़ाने



Dedicated to
युवाओंके नाम

Dedication Summary
ये रचना उन युवाओंके नाम है जो जवानी के जोश में भूल जाते है कि जिसके कंधों पर बैठकर दुनिया देखी, जिसने अपना पेट काटकर हर खाइशें पूरी की, खून को पसीना बनाकर बहा दिया; आज उसीके आगे तनकर चलते है।
हर धर्म सिखलाता, मात पिता की इज्ज़त करना, उनके आगे ऊंची आवाज़, सीना तानकर खड़े होना या उफ्फ तक केहना पाप के समान है।
काश आजका नौजवान समझे और अमल करें

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