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कहाँ है ईश्वर

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03 -Feb-2018 Akshunya Integration Poems 0 Comments  464 Views
Akshunya

कण कण में वास करे, वो ईश्वर है;
तुझ में, मुझ में ईश्वर है;
जो आस्तिक है, जो है नास्तिक, उसमें भी ईश्वर है;
हर प्राणी में जो समाया, वो ईश्वर है;
सुख में, दुख में, सृष्टि के हर रस में ईश्वर है;
बच्चे की मुस्कान में ईश्वर है;
गरीब की दुआओं में ईश्वर है;
इंसानियत में ईश्वर है;
शेर के शिकार में भी ईश्वर है
कहाँ कहाँ मैं गिनाऊ कि ईश्वर है;
परंतु
दंगों में नहीं है ईश्वर;
मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा या गिरिजाघरों में नहीं बँटा है ईश्वर;
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, इस लड़ाई में नहीं है ईश्वर;
सरहदों में नहीं बटा है ईश्वर;
बलात्कारियों या व्यवचारियों में भी नहीं है ईश्वर;
अपने स्वार्थाथ जो करे हत्या, उसमें नहीं है ईश्वर;
सत्ता के लोभ में जो करे शोषण, उसमें नहीं है ईश्वर;
अब फैसला है आपके हाथ, क्या आप में है ईश्वर।।



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