Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कहो ना प्रिय भँवर है

0
29 -Mar-2021 Keshav Motivational Poems 0 Comments  74 Views
Keshav

कहो ना प्रिय भँवर है।
उड़ान को पंख नहीं है।
दूर-दूर अंबर ऊँचा है।
और क्षितिज पर स्याह परत।
मन की व्यथा कुंद हो रहा।
ओ प्रिय जीवन राग अधर है।।

मृदुलता खो गया है ओस सा।
जैसे ओस सूर्य किरण के आए।
इधर-उधर है अथाह भँवर सा।
मन चेतन बन फिर से घबराए।
अंतर हृदय के सभागार में द्वंद्व हो रहा।
सोने की चिन्ता अब तो हुआ जहर है।।

ताराओं की अब तो बारात दिखे।
मन मंदिर में अभिलाषा जगी तो कैसे।
कहीं कुपित मन शापित बन जाऊँ।
हृदय वेदना ज्वार भरा और काँपा हूं भय से।
अभी तक थी ज्योत्सना जो मंद हो रहा।
अभी से व्याकुल हूं, अभी तो रात पहर है।।

कभी तो बिहँसे मधु मालती मन की।
क्यों कर कोरा-कोरा पड़ा हृदय का कोना।
किससे कहूं दुविधाओं का सागर मचला है।
अब तो कैसे समझूं ,कैसे इसे बिलोना।
जीवन का राग यूं उलझा सा छंद हो रहा।
यह कंकर भरी राहों भरा शहर है।।



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017