Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कई बार कुछ सोचता हूँ.....

1
26 -Nov-2016 KP Lonely Poems 0 Comments  928 Views
KP

कई बार कुछ सोचता हूँ,
कभी सोते सोते कुछ याद कर छन भर के लिए रोता हूँ,
.
जो उम्मीद थी कभी,
वो कब का टूट चूका है,
.
बना था एक साथी नया,
जिसका साथ कब का कहीं पीछे छूट चूका है,
.
हर राह अब तनहा सा लगता है,
हर अपना भी अब पराया सा दिखता है,
.
जी चाहता तो है किसी के सीने से लग कर जी भर रो लूँ,
पर कोई भी इस लायक नहीं दिखता है.....

#KP



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017