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कल्युग दैत्य

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07 -Oct-2021 Kumar Ashish Dussehra Poems 0 Comments  24 Views
कल्युग दैत्य

युगो से जलाते आ रहे पर तू क्यो जलता नही ..I
दैत्य दशानन तू कल्युग मे भी क्यो मरता नहीं ..II
अपहरण की जो रीति तूने बनायी थी तभी ..I
आज भी वो सब करने से क्यो कोई डरता नहीं ..II

जन खून से नहाते आ रहे तू क्यो सुधरता नही ..I
तू दश् से इक अब इक से इक बात कोई करता नही ..II
आज भी दुर्भावना वस भेंडिये समाज को छल रहे ..I
जतन करते सपेरे पर तेरा विष क्यो उतरता नही ..II

आज सीता को बचाने के लिए कोई प्रयास करता नही..I
मरेगा बिन मौत के ही इसिलिये जटायु आगे बढता नही.II
माया में भरा जो अम्रत राम निजबाण से भी जलता नही..I
हे कल्युग दैत्य एकानन तूतो सायद इसिलिये डरता नहीं.II



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