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Kamal

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27 -Nov-2016 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 1 Comments  6,567 Views
Suresh Chandra Sarwahara

कमल
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सुन्दर कोमल पुष्प कमल
लगते हैं कितने निर्मल ,
कीचड़ में भी रहकर ये
हँसी बिखेरे दुग्ध धवल।
नीचे लहरें हैं चंचल
ऊपर ये हैं खडे़ अटल,
खुश रहते हैं अपने में
नन्हे शिशु जैसे निश्छल।
नहीं छोड़ते जल से जड़
सिर ऊँचा रखते हर पल,
गंध लुटा दिन भर अपनी
संध्या को जाते हैं ढल।
संघर्षों से पाते बल
चाह नहीं पाने की फल,
कमल 'आज' में जीते हैं,
नहीं सोचते क्या हो 'कल' ।
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सुरेश चंद्र "सर्वहारा"



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1 More responses

  • poemocean logo
    Kshitij (Guest)
    Commented on 02-August-2020

    Great.

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