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Kambal Pyare

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03 -Nov-2015 Dr. Pradeep Shukla Winter Season Poem 0 Comments  3,352 Views
Dr. Pradeep Shukla

कम्बल भैय्या
कहाँ छुपे हो
बाहर निकलो प्यारे
रोज रात में जाड़ा बाबू
आकर तुम्हे पुकारे

पिछले बरस
गया था जाड़ा
सात समंदर पार
इधर उधर बस पड़े हुए थे
तब से तुम बेकार

आ जाओ
तुम भैय्या
देखो जाड़ा खड़ा दुआरे

देखो तो
संदूक के अन्दर
कहीं छुप गया होगा
पूरी गर्मी उसने भैय्या
ए सी का सुख भोगा

आ जाओ अब
पहलवान
ये जाड़ा तुम्हे निहारे

पड़े सुनाई
मिमियाई सी
कम्बल की आवाज
कड़ी धूप में मम्मी ने
उसको डाला है आज

मुझको गर्मी
बहुत लग रही
कोई मुझे उतारे

दया आ गई
दादी को
कम्बल को वह ले आईं
धूल झाड कर बड़े प्यार से
उसकी तहें लगाईं

सुनो! आज से
बना रहेगा
जाड़ा संग तुम्हारे
कम्बल भैय्या
कहाँ छुपे हो
बाहर निकलो प्यारे.

Kambal Pyare


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