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काँटों में भी मुस्काते हैं

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08 -Nov-2015 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Flower Poem 0 Comments  1,005 Views
Dr. Roopchandra Shastri Mayank

काँटों में भी मुस्काते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।
नागफनी की शैया पर भी,
ये हँसते-खिलते जाते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।
सुन्दर सुन्दर गुल गुलाब के,
सारा उपवन महकाते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।
नीम्बू की कण्टक शाखा पर,
सुरभित होकर बलखाते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।
काँटों में भी मुस्काते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।

काँटों में भी मुस्काते हैं


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