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कारगिल विजय दिवस पर

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02 -Aug-2019 nil Patriotic Poems 0 Comments  427 Views
कारगिल विजय दिवस पर

कारगिल हो या द्रास न हम कश्मीर किसी को देंगे
आँख उठाकर देखा जिसने खून उसीका पी लेंगे
यही हमारा देशः कि जिसके सर का मुकुट हिमालय
यही हमारा देश कि जिसको कहते हैं देवालय
सबसे पहले न्ज्ञान ज्योति का हमने दीप जलाया
हर मानव को भाई कहकर हमने गले लगाया
हर कुर्बानी देकर इसकी शान न जाने देंगे ...

गंगा यमुना का नीर यहाँ खेतों में स्वर्ण उगलता
हिन्द महासागर चरणों को धोकर खूब उछलता
उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम खिची हुई सीमा रेखा
भारत मां को दुश्मन ने तिरछी नज़रों से देखा
सोने से सपनों में उसके मार मार भूसा भर देंगे

हमने गौतम का गीत सभी दुनिया को था सिखलाया
हमने गीता का सन्देश विश्व के घर घर में पहुंचाया
गाँधी नेहरू ने विश्व शांति का हर दम बिगुल बजाया
इसीलिए तो हमने अबतक बिष को गले लगाया
बाज न आया जो हरकत से धरा ध्वस्त कर देंगे ...

कारगिल विजय दिवस पर [१६.०७.२०१९]

कारगिल हो या द्रास न हम कश्मीर किसी को देंगे
आँख उठाकर देखा जिसने खून उसीका पी लेंगे
यही हमारा देशः कि जिसके सर का मुकुट हिमालय
यही हमारा देश कि जिसको कहते हैं देवालय
सबसे पहले न्ज्ञान ज्योति का हमने दीप जलाया
हर मानव को भाई कहकर हमने गले लगाया
हर कुर्बानी देकर इसकी शान न जाने देंगे ...

गंगा यमुना का नीर यहाँ खेतों में स्वर्ण उगलता
हिन्द महासागर चरणों को धोकर खूब उछलता
उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम खिची हुई सीमा रेखा
भारत मां को दुश्मन ने तिरछी नज़रों से देखा
सोने से सपनों में उसके मार मार भूसा भर देंगे

हमने गौतम का गीत सभी दुनिया को था सिखलाया
हमने गीता का सन्देश विश्व के घर घर में पहुंचाया
गाँधी नेहरू ने विश्व शांति का हर दम बिगुल बजाया
इसीलिए तो हमने अबतक बिष को गले लगाया
बाज न आया जो हरकत से धरा ध्वस्त कर देंगे ...



Dedicated to
सभी प्रबुध्ध पथाकोम को

Dedication Summary
प्रेरणात्मक कविता

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