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कर्मशील

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13 -Nov-2021 अभिषेक आर्य..! Motivational Poems 0 Comments  98 Views
अभिषेक आर्य..!

संघर्ष में अभिमान ही
विनाश की पहचान है
कर्मयोधा वो है, जिसमे सूर्य का प्रकाश है ।
वो मनुष्य विजय सदा
जो लड़ने से डरा नहीं ।
जीत का घमंड जिसमे
जीत पर खरा नही।
हंसते -हंसते मुश्किलों को ,
तोड़ता - मरोड़ता ।
खंड -खंड मेहनतो को ,
विनम्र भाव जोड़ता ।
तुम अहम की आग में ,
ना खुद को भूल जाना ।
प्रलय के आग में जलो,
ना ऐसा कुछ कर जाना।
युद्ध के नेपथ्य में तुम,
युद्ध जो हो खेलते ।
विनाश सिर्फ ही नही ,
सर्वनाश भी तुम झेलते ।
क्यों कपट जरूरी है ?
ताकतों का शोर क्या ?
सत्य राह पे खड़े ,
असत्य का फिर जोर क्या ?
सैंकड़ों दुश्मन बने,
एक को गिराने में ।
वो कभी डिगा नहीं ,
वो कभी गिरा नही ।
वो प्रचंडकारी है वो दाव तेरे जानता है ।
तू मनुष्य तुच्छ है ,
वो सर्वशक्तिमान है ।
संघर्ष में अभिमान ही
विनाश की पहचान है
कर्मयोधा वो है, जिसमे सूर्य का प्रकाश है ।


आर्य ..!

कर्मशील


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