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कर्ज

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04 -Jan-2016 अनीता गुप्ता Patriotic Poems 0 Comments  819 Views
अनीता गुप्ता

क़र्ज़

क्या है ये पर्याप्त
कुछ संवेदनाहीन संवाद
एक तिरंगे में लिपटी सलामी
एक मरणोपरांत चक्र की निशानी
दो बरस का अबोध
आज अग्नि में पिता की गोद
नयनजल की ख़ामोश धार
माँग रही देश से विचार
कब तक मौत की होली
कब तक लहू की रंगोली
कब बुलंद होगी आवाज़ें
कब बाज़ुओं में फौलादें
आ गई है अब वो घड़ी
छलनी आतंक की हर लड़ी
बस एक कर्मठ संकल्प
धाराशायी हर भंजक प्रकल्प
प्रचण्ड लपटों की सौगंध
हुंकार भर तू ले ये प्रण
चिता की हर एक चिंगारी
शहीद देश पर क़र्ज़ भारी
अनीता गुप्ता



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