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कवि की जिंदगी

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13 -Mar-2019 mannu bhai Moral Education Poems 0 Comments  43 Views
mannu bhai

कवि की जिंदगी

दुनिया आसमान है तो टूटा हुआ तारा है हम।
दुनिया दरिया है तो शांत सा किनारा हैं हम।
दुनिया राजनिति है जहां लगता नारा हैं हम।
दुनिया महफ़िल है तो गम का सहारा है हम।

दुनिया गर रोटी है तो तपने वाला तवा है हम।
दुनिया वातावरण है तो अदृश्य हवा है हम।
दुनिया बनिये की दुकान है तो पवा हैं हम।
दुनिया अस्पताल है तो रोगी की दवा हैं हम।

दुनिया बैंक है तो लेन देन वाले नोट है हम।
दुनिया चुनाव है तो पड़ने वाले वोट हैं हम।
दुनिया लोहार की दुकान है तो चोट है हम।
दुनिया सुनार की दुकान है तो खोट है हम।

दुनिया खेल का मैदान है तो खिलाड़ी है हम।
दुनिया सर्कस है तो जोकर अनाड़ी हैं हम।
दुनिया लंबी सड़क है तो चलती गाड़ी हैं हम।
दुनिया समुन्दर है तो अविरल खाड़ी हैं हम।

दुनिया का प्रश्न बनता है आखिर कौन हैं हम।
हजारो सवालो को सह कर भी मौन हैं।हम।
बेजुबान दुनिया वालो के लिए ठोन है हम।
कंगूरे में नींव की ईंट है इसलिए गौन है हम।

मनोज कुमार पुरोहित,अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल)



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