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Kavita ki Upyogita

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22 -Sep-2016 Bas Deo Sharma Miscellaneous Poems 0 Comments  454 Views
Bas Deo Sharma

कवि जब कवितायें सुनाता है
अपने मन की बात बताता है
जो पहले से श्रोता जानते हैं
उन बातों को दोहराता है

जो पहले से ही खुश होते हैं
कवि उनको और हँसाता है
और जिनके पेट भरे रहते
उन्हें भूख का अर्थ बताता है

बंगलोंमें रहने वालोंको कवि
बेघरों का दर्द समझाता है
एयरकंडीशंड सभागार में
गरीबी की कविता सुनाता है

मज़लूमों की मजबूरी को
आय का साधन बनाता है
तरह तरह की कविताओं से
गरीबों का मज़ाक उड़ाता है

कवि के कविता लिखने से,
क्या भला कोई हो जाता है?
क्या भूखा पेट भर जाता है?
या नंगा तन ढक जाता है?

किसी का कर्ज चुक जाता है?
या रोगीका इलाज होजाता है?
रोजगार किसी को मिलता है ?
या बेघर को घर मिलजाता है?

भूखी माँ की सूखी छाती में
क्या कभी दूध आ जाता है?
क्या गोदी का भूखा बच्चा
उसे सुनके तृप्त हो जाता है?

श्रोताओं की ताली बजती हैं
कविका मन खुश हो जाता है
आयोजक से रुपये लेकर
वह घर वापिस आ जाता है

कविता के नाम पर कोई कवि
जब फूहड़ चुटकुले सुनाता है
कविता अपना सिर धुनती है
और साहित्य बहुत शर्माता है



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