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केसर आम

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17 -Nov-2018 Abbas Bohari Relationship Poems 0 Comments  180 Views
Abbas Bohari

अल्लाह के रहमो करम परही है टिकी क़ायनात
पत्ता भी नही हिलता बगैर मालिक की इज़ाजत

कर्म करना ही है इंसा का धर्म
आंधी आये चाहे चले हवा गर्म

दिखाई हमारे बागबान ने भरपूर चाहत
लगा दी दाव पर अपनी सेहत ओ राहत

मालिक करू शुक्र बजाके सरेख़म सज़दा
तेरे सिवा कभी ना दु किसी और को सदा

आम के आम, गुठलियों के भी दाम
कर दिखाये सलमाने, करू मैं सलाम

जो आज भी करते हो नाचीज़ से प्यार
सबका रख़ा है हिस्सा, पधारे हमारे घर

मीठा केसर आम हमारा, जोड़ दे परिवार
कहे अब्बास दोबारा, म्यान करो तलवार



Dedicated to
Salma

Dedication Summary
A true 'Kisan' loving and caring the mango farm!

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