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खग की आत्मानुभूति

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खग की आत्मानुभूति: This poem describe the feeling of a bird on destruction of trees.

13 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Birds Poem 0 Comments  529 Views
Ankita Singh ( Ankita  Lucknowist )

काट लिए सब वृक्ष मनुज ने,
विपदा डाली मेरे सर,
कैसे बनाऊ नीड़ मैं अपना,
कैसे दूँ हौसलो को पर l

काट लिये सब वृक्ष मनुज ने,
बंद किये दीवार और दर ,
कहाँ जाऊँ चुगने नेह के मोती ,
कैसे मिटाऊँ भूख प्यास का डर l

काट लिए सब वृक्ष मनुज ने,
चैन सुकून मेरा लिया है हर ,
कैसे रखू बच्चों को सुरक्षित ,
आँसु नैन में रहे उतर l

काट लिये सब वृक्ष मनुज ने,
लूट लिए मेरे गाँव - शहर ,
काश रोप पाऊँ मैं एक पौधा,
उस पर बनाऊँ अपना मैं घर ll

© अंकिता सिंह,
लखनऊ , उत्तर प्रदेश

Email - anks26.as@gmail.com



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