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खैनी, गुटखा, ज़र्दा, पान मसाला…

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13 -May-2016 Thakur Gourav Singh Social Issues Poems 7 Comments  995 Views
Thakur Gourav Singh

खैनी, गुटखा, ज़र्दा, पान मसाला…
पैकेट खोल फट से मुँह में डाला ,
सस्ता सा “नशा” मगर होती है शान,
हाँ ,मैं भी रखता हूँ ऐब में अपना एक नाम ।


धीरे-धीरे उस एक रूपए के पाउच ने,
ऐसा रस घोला मेर मुँह में ,
खाली-खाली सा कुछ लगता है ,
जब पैकेट से मुँह नहीं भरता है ।

एक अलग सी महक एक अलग सा सुकूँ ,
क्या हर्ज़ है इस में जो मैं इसको चबा लूं?
लड़की,दारु का शौक नहीं मुझे ,
सिर्फ तम्बाकू की लत से ही तो दिन बुझे ।


लम्बे-लम्बे से कश जब “सिगरेट ” के जलते हैं ,
कॉलेज की कैंटीन में लड़कियों के दिल मचलते हैं ,
वो रह-रह के धुओं के छल्ले उड़ाना ,
सिगरेट पीने का तरीका अपने जूनियर्स को सिखाना ।


उम्र चौबीस की जैसे ही मेरी आयी,
मैं डॉक्टर के पास पहुंचा लेने दवाई ,
भूख लगना एकदम बंद सा हो गया था,
हर खाने का स्वाद बेस्वाद हो गया था ।


मुँह को खोला जब तो दाँत गल गए थे ,
जुबान पर तम्बाकू के निशान छप गए थे ,
गालों में बच रहा था सिर्फ कुछ चमड़ी का नज़ारा ,
माँ रो रही थी कि बचा लो
ये मेरा “लाल” है प्यारा ।


“कैन्सर ” का नाम जैसे ही डॉक्टर ने सुनाया ,
मेरे पैरों तले की धरती में मानो भूचाल आया ,
अभी तो इतने सपने बाकी थे मेरे ,
कैसे छूट गए वो सपने अधुरे।


क्यूँ इस तम्बाकू को मैंने गले लगाया ?
अपनी ही कश्ती को पानी में डुबाया ,
जीवन जीने की चाह एक ओर तलबगार थी ,
दूसरी ओर मृत्यु मेरे सर पर सवार थी ।


बहुत से सपने टूट गए
बहुत सी उम्मीदें बह गईं ,
परिवार के लिए न कर सका कुछ
उसकी सूनी माँग भी भरने से रह गयी ,
जलाओ जब भी मुझे तुम शमशान में ले जाकर ,
एक तस्वीर खींच लेना
मेरे खुले हुए मुँह की
जनता को दिखाकर ।।


ठाकुर गौरव सिंह
#अल्फाज़#दिल#से



Dedicated to
Tobacco Addicted

Dedication Summary
A Message To All-
Chewing tobacco and other forms of smokeless tobacco are more harmful and addictive than you might think.

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7 More responses

  • poemocean logo
    Taniya mehta (Registered Member)
    Commented on 07-June-2016

    Really true said.. I hope ki sab ye bad habit ko quit kr de.. Aur ek happy life jiye.

  • Thakur Gourav Singh
    Thakur Gourav Singh (Registered Member)
    Commented on 16-May-2016

    मैने अपने एक भाइ को खो दिया है मैं नही चाहता की कोई दूसरा अपने किसी को खोये

    आप सभी को धन्यवाद मेरी कविता को पसंद करने के लिये....

    #अल्फाज़#दिल#से.

  • dhiraj Kumar
    Dhiraj Kumar (Registered Member)
    Commented on 14-May-2016

    gr8 poem..

  • poemocean logo
    Kavita thakur (Guest)
    Commented on 13-May-2016

    nice one.

  • poemocean logo
    Niharika (Guest)
    Commented on 13-May-2016

    Its just an awesome poem spreading social awareness. I hope u'll keep writing such poems & open the eyes of those people who just die to eat such things. Pls do write a poem that will open the eyes of the smokers & pls let them know the way they are heading towards their own destruction. This is my humble request.

  • Vivek Kumar
    Vivek Kumar (Registered Member)
    Commented on 13-May-2016

    मैं आपकी कवितायेँ पढता रहता हूँ।

    आज आपने अलग लिखा है और दिल से कह रहा हूँ कि बेहतरीन लिखा है।

    आपकी ये कविता आज के युवाओं को नसे के दुष्परिणाम से अवगत करायेगी।.

  • Vivek Kumar
    Vivek Kumar (Registered Member)
    Commented on 13-May-2016

    मैं आपकी कवितायेँ पढता रहता हूँ।

    आज आपने अलग लिखा है और दिल से कह रहा हूँ कि बेहतरीन लिखा है।

    आपकी ये कविता आज के युवाओं को नसे के दुष्परिणाम से अवगत करायेगी।.

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