Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

खामोशी का जहाँ बहुत आबाद सा है ।

0
24 -Apr-2016 pankaj taparia Lonely Poems 6 Comments  980 Views
pankaj taparia

हर एक दिशा बहुत खामोश सी है,
हर एक मंजर बहुत चुपचाप सा है;
शांत आज ये सारी हवाऐं भी है,
खामोशी का जहाँ बहुत आबाद सा है ।
.
.
मंजिलें रास्तों की मोहताज नहीं है अब,
हर तरफ अकेलों का समाज ही है अब;
क्यूँ दिखावों से अब इतना लगाव सा है,
खामोशी का जहाँ बहुत आबाद सा है ।
.
.
तकलीफ बनती जा रही सब सच्चाईयां है,
बोझ सी लगने लगी अपनी ही परछाइयां है;
क्यूँ ठहाकों का मौसम अब गुमनाम सा है,
खामोशी का जहाँ बहुत आबाद सा है ।



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

6 More responses

  • viki
    Viki (Registered Member)
    Commented on 25-April-2016

    shandaarjabardast :-).

  • poemocean logo
    वंदना (Guest)
    Commented on 25-April-2016

    बहुत सुंदर.....

  • poemocean logo
    Ajay saini (Guest)
    Commented on 25-April-2016

    तकलीफ बनती जा रही सब सच्चाईयां है,
    बोझ सी लगने लगी अपनी ही परछाइयां है;
    क्यूँ ठहाकों का मौसम अब गुमनाम सा है,
    खामोशी का जहाँ बहुत आबाद सा है ।.

  • poemocean logo
    Meghna Taparia (Guest)
    Commented on 25-April-2016

    Too Good Poem....Keep Writing.....

  • poemocean logo
    Naveen verma (Guest)
    Commented on 25-April-2016

    gud yr.

  • poemocean logo
    Ajay saini (Guest)
    Commented on 25-April-2016

    A great lines of poem...

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017