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खोया हुआ सा कुछ

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24 -May-2021 Musafir Sad Poems 0 Comments  431 Views
खोया हुआ सा कुछ

खोया हुआ सा कुछ
मोईन मुसाफीर
7776878784

शाम ढले तन्हाई में तेरी याद आए तो खुद को बहलाते हैं
कभी खुद से बतीयाते हैं... कभी तेरी याद को समझाते हैं

किसी को टुट कर चाहने वाले..... क्या खूब सज़ा पाते हैं
कभी दिन का चैन खोते हैं... कभी रात की नींदें गँवाते हैं

वो मुझे देख कर खुद में सिमट जाना उस का हया से
चाहत के ज़माने भला.... फिर कहाँ लौट कर आते हैं

कभी मुद्दतों बाद जाते हैं..... उस हरजाई के दर पर
फिर कुछ याद कर बिना दस्तक दिए ही लौट आते हैं

आशिकों का चलन भी अजीब होता हैं मुसाफीर
चोट लगती हैं दिल पर तो खुल कर मुस्कुराते हैं



Dedicated to
Most important person in my life

Dedication Summary
I was love her but she didn't.
I use some emojis for her.

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