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खुद ही अब इंसाफ करो

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15 -Jan-2016 LALJEE THAKUR(Haffman) Motivational Poems 0 Comments  2,124 Views
LALJEE THAKUR(Haffman)

खुद ही अब इंसाफ करो

उसके हब्सिपन के कारण बस मेरी साँसे टूट गई,
सच कहती हूँ दुनिया से आत्मा अब मेरी रूठ गई,

कुचल के मेरे चेहरे को सच उसने ही तो मारा था,
कानून माने या न माने वो सबसे बड़ा हत्यारा था,

मैंने भी तो चाहा था जग में दूर कभी उड़ान भरू,
दुनिया ये तो जालिम है किसका मैं गुणगान करू,

चंचल सा मेरा जीवन पलभर में जो बदल गया,
सुन ये काली करतुते दिल दुनिया का दहल गया,

उसके कुकर्मो से नजरे भारत माँ की झुक गई,
आई बारी फांसी की तो जज्बातों में रुक गई,

हँसी आती है यह सुनकर आज फिर वो छूट गया,
मैं क्या बताऊ सच तुझे कफ़स का ताला टूट गया,

आज मुझे लगा डर फिर ,कानून के रखवालों से,
कौन सजा उसे देनी है ,जिस्मो के दिलवालो से,

बच्चा उसको मान लिया जो कातिलों का दादा है,
सच कहती हूँ यह तो पीड़ा उस पीड़ा से ज्यादा है,

मेरा कातिल शातिर होकर अब सड़कों पर दौड़ेगा
बेढंगी व्यवस्था को भारत में हाँ बच्चा बच्चा रौंदेगा,

जिसकी आशा में थी बैठी दुखमय ये संसार सभी,
हाथ मलता रह गया सब दुनिया में बेकार अभी,

उन बुतों पर मत तू जाना ,काली पट्टी से बंधी हुई,
निर्भया की रूह तरपे फिर भी क्यों तराजू झुकी हुई,

मैं कहती हूँ दुनिया से कि अंधों पे मत विश्वास करो,
जीना है इस धरती पे तो खुद ही अब इन्साफ करो,

लालजी ठाकुर ,दरभंगा
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खुद ही अब इंसाफ करो


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