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कितना बदल गया इंसान....

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10 -Jun-2016 pankaj taparia Human Being Poems 1 Comments  1,807 Views
pankaj taparia

खुश होकर एक दिन,
खुदा ने इंसान बना डाले;
मिट ना सके कभी, ऐसे
अमिट निशान बना डाले ।
.
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चमत्कारों से अपने उसने,
हजारों जहान बना डाले;
करामातों से अपने उसने,
जमीं-आसमान बना डाले ।
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ऋतुएं, मौसम, हवाएं,
खेत-खलिहान बना डाले;
घटाएं, फिजाएं, अदाएं,
रेत-रेगिस्तान बना डाले ।
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खुदगर्ज इंसानों ने अब,
कई भगवान् बना डाले;
फर्ज में बस उस रब, के
मंदिर आलीशान बना डाले ।
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कितना बदल गया इंसान ।।



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1 More responses

  • poemocean logo
    Kumari anushka (Guest)
    Commented on 07-January-2020

    Very good.

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