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कितना भी लिख दूं कम पड़ जाता है मां

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09 -May-2020 Sushil Kumar Mothers Day Poem 0 Comments  141 Views
Sushil Kumar

परेशानी चाहे जितनी भी हो
हमारे लिए मुस्कुराती है मां

हमारी खुशियों की खातिर
दुखों को भी गले लगाती है मां

हम निभाएं या ना निभा पाएं अपना फर्ज
लेकिन हर फ़र्ज़ निभाती है मां

हम जो देखते हैं सपना
उसे सच बनाती है मां

साया बन कर साथ निभाती,
चोट न लगने देती है मां
पीड़ा अपने उपर ले लेती
हमेशा सुख देती है मां

चूल्‍हे की आग में खुद को तपाती
बच्चे की ग़लतियाँ ममता में भुला देती है मां

मै कितना भी लिख दूं,
लेकिन तेरे आगे वो सब कम पड़ जाता है मां।।



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