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कोई गुनाह कर दिया हो शिक्षक बनकर ।

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04 -Sep-2018 anuradha thalor Teacher Day Poem 0 Comments  379 Views
anuradha thalor

कभी कभी अपने बारे मे सोचकर ही यूँ लगता है जैसे
कोई गुनाह कर दिया हो शिक्षक बनकर ।
अब वो पहले सी इज्जत और सम्मान क्यों नही मिलता शिक्षक को
क्यों अपने ही शिष्य हर कही छाती ताने आँख दिखाते मुँह फुलाते नजर आते है ।
क्यों वो ही शिष्य जिन्हे आप उनकी जिंदगी को स्वर्णिम अक्षरो मे लिखने की प्रेरणा देते है
वो ही शिष्य आपके ज्ञान को काली स्याही बराबर भी नही समझते ।
क्यों वो इस बालपन मे ही कड़वाहट से भर गए है
ये विषय शोचनीय है
शायद हम शिक्षक उनकी कसौटी पर खरे नही उतरते
या फिर शायद हमारे शिष्यो मे राजनीतिज्ञ बनने की होड़ सी लग गई है ।
या फिर शायद हम खुद ही एक दूसरे की गलतियो को गिनाने मे इतने मगन है
कि हम उस पवित्र बंधन को ही भूल गए है
क्यों न हम सारी गलतफहमियो को दरकिनार करे
क्यों न हम एक नई शुरुआत करें
हम शिक्षक मर्यादित रहे और हमारे शिष्य हमे पहले सा स्वीकार करे
क्यों न हम उन्हे एक अच्छा राजनीतिज्ञ बनाने की बजाय एक सर्वश्रेष्ठ मानव बनाए ।
जब राह एक है तो क्यों न हम गुरु शिष्य एक श्रेष्ठ जिन्दगी का निर्माण करें ।



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