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कोरी आशाएं

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08 -May-2016 Dev Singh Dream Poems 1 Comments  847 Views
कोरी आशाएं

ना जाने कैसी आशाएं पाल बैठा हुँ
जो हो नही सकता मन में वही खहयाल लिए बैठा हूँ।

इल्म है मुझे टूट जायेंगे ख्वाब सारे मेरे इक दिन, बिखर जायेंगे मोतियों की तरह सभी,
मगर फिर भी लिए मन में एक सवाल बैठा हूँ।

न जाने कैसी आशाएं पाल बैठा हूँ, जो हो नही सकता लिए मन में वही ख्याल बैठा हूँ

जब हर चीज ही अधूरी मिलनी थी मुझे तो क्यों ऐ जिंदगी तू पूरी मिली मुझे,
ऐसा करूँगा वैसा करूँगा बेरंग जिंदगी में कुछ रंग भरूंगा
इसी कशमकश में गुजरे कई साल लिए बैठा हूँ।

न जाने कैसी आशाएं पाल बैठा हूँ, जो हो नही सकता लिए मन में वही ख्याल बैठा हूँ।



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1 More responses

  • Vivek Kumar
    Vivek Kumar (Registered Member)
    Commented on 09-May-2016

    Nyc 1.

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