Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कृषि है प्रकृति की जान

0

Krishi Hai Prakriti Ki Jaan: As we know farmers and agriculture is very important for any civilization to survive. This poem describe the importance of farmers and farming for our society. Today due to development of urbanization and industries the agricultural lands are going decreasing. Also the condition of farmers are becoming miserable day by day. They are committing suicide due to debt. Government is unable to do enough to help them. We should understand the importance of agriculture. Agriculture keep us near nature. We should promote agriculture by providing all basic facilities to the farmers. We should understand that only farming can fulfill the food demand of our society. This Hindi poem describe the importance of agriculture, farming and farmers very well.

29 -Jun-2019 Naren Kaushik Culture Poems 0 Comments  1,103 Views
कृषि है प्रकृति की जान

आओ एक बीड़ा उठाएं मरते किसान को समृद्ध बनाएं
जिस कृषि ने पेट भरा सभी का उस कृषि ने फिर रोजगार बनाए
आओ एक बीड़ा उठाए
हर घर मे सोना चांदी भरकर देश को फिर सोने की चिड़िया बनाए
अतिथि देवो भव: के फिर गूंजे नारे आओ भाईचारे की वो मिसाल फिर भारत को बनाए।
आओ एक बीड़ा उठाए।
न फिर कोई दहेज की भेट चढे न हो किसी बेटी का रेप
आओ ये मुहिम चलाए
न फांसी पर झुलता किसान होगा न भुख से मरता कोई गरीब होगा आओ फिर वही भारत बनाए।
आओ एक बीड़ा उठाए।
धरती माँ के सौदे हो रहे मशीनी युग लाने को एक बात बता मेरे भाई क्या मशीने देगी खाने को।
प्रकृति का नाश मशीने फिर तड़पोगे शुद्ध हवा पानी को
एक बात बता मेरे भाई क्या मशीने देगी पीने को।
आओ प्रकृति को रोजगार बनाए।
आओ एक बीड़ा उठाए।
कौशिक नै तै मन की बात रख दी।
कृषि है प्रकृति का गहना
ओर कौशिक का तो बस यो कहना आओ किसान को सम्रद्ध बनाए कृषि को रोजगार बनाए और जन जीवन की जान बचाए।
आओ एक बीड़ा उठाए।

नरेन कौशिक समचाना



Dedicated to
किसान

Dedication Summary
किसान हर किसी का पेट भरता है प्रकृति की रक्षा करता है पर उसकी कोई नही सुनता
मै पुछना चाहता हू क्या भुख लगेगी तो इसान मशीने खा पायेगा अन्नदाता का अनादर कर उसे मरने को छोड़ने वाली सरकार यह कब समझेगी की ज्स भारत को विदेसी लुटने आये थे उसकी सम्रद्धी का कारण खेती था ना की मशीने। किसान और खेतो की रक्षा करे जय जवान जय किसान।

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017