Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वृंदावन

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28 -Aug-2021 सिद्धार्थ पांडेय Krishna Janmashtami Poems 0 Comments  169 Views
वृंदावन

हे कान्हा ! तुम मुझको ,कैसी हालत में छोड़ गए। क्या ख़ता हुई बलता भी दो ,क्यो ऐसे मुँह मोड़ गए। मैंने सपने में भी सोचा न था ऐसा भी कुछ कर दोगे, हृदय कणिका कहते - कहते ,मेरा दिल क्यो तोड़ गए। क्या अपनी इस राधा पर ,थोड़ा भी तरस नह

कन्हैया का वशीकरण

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08 -Aug-2021 Shutisha Rajput Krishna Janmashtami Poems 0 Comments  189 Views
कन्हैया का वशीकरण

"कान्हा "का प्रेम मन में ऐसा मोड़ा उमडा , भक्त भूल गया घर बार ,उसे ने याद रहा संसार। गोपियां तो प्रेम में इस कदर डूब गई हैं , दे उठाकर "गिरधर "को पांव की मिट्टी ,पाप पुण्य सब भूल गई हैं। होने लगी है "श्याम "की ,अर्धांगिनीय

मैं कान्हा मैं मोहन..

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मैं कान्हा मैं मोहन..

मैं कान्हा मैं मोहन....!! मैं नटखट मैं गोपाला.! मैं कान्हा मैं माखनचोर.!! मैं देवकी पुत्र मैं यशोदा नंदन.! मैं वासुदेव मैं नंदकिशोर.!! सूरत मेरी भोली भाली.! चंचल चितवन मीठी वाणी ठोर.!! मैं गिरधारी मैं बनवारी.! मैं मोहन कहते

Tumak tumak chale chote khanhaiya

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12 -Mar-2018 Pragya Sankhala Krishna Janmashtami Poems 0 Comments  2,847 Views
Tumak tumak chale chote khanhaiya

Tumak tumak chale chote khanhaiya Gwala ka rup dhare khanhaiya Natakhat makhan churate khanhaiya paijanya pairo me bandhe khanhaiya mata ke ye dulare khanhaiya Trilok swami khanhaiya Yashoda ke nandlala khanhaiya Basuri roj bajaye khanhaiya Nit naye roop dikhave khanhaiya More mukut lagaye khanhaiya Swaran mukh mandal khanhaiya Sabke dulare krishna khanhaiya

कान्हा कन्हैया नटखट चितचोर

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30 -Jan-2018 Anju Goyal Krishna Janmashtami Poems 0 Comments  3,484 Views
कान्हा कन्हैया नटखट चितचोर

जन्माष्टमी पर एक लघु प्रयास कान्हा कन्हैया नटखट चितचोर मैया के आँगन की शोभा बढ़ावे । शीश पे मोर पंखी का सुंदर ताज धर सबके नैनो को बहुत सुख पहुँचावे । नन्हे नन्हे पाँवो से कर अठखेलियाँ मुख पे माखन लगा श्याम इतराव

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