Kuchh ankahi si baten / कुछ अनकही सी बातें

0
24 -Nov-2017 shalu L. Love Poem 0 Comments  129 Views
Kuchh ankahi si baten / कुछ अनकही सी बातें

कुछ अनकही सी बातें

कहीं शाम किसी की याद में, हसीं नग्में गुनगुनाती है,
रोने लगता है दिल, जब बात जुबां पर आके रुक जाती है,

कहने को तो बातें है हजार मगर, शुरुवात कहाँ से करें हम ,
भूल जाते है सब कुछ, जब भी ख्याल आपका करते है हम.

चाहत है या कोई मुश्किल उलझन में जिसकी कही खो जाते है
अपनी किसी अदा पर नहीं बस उसकी एक हसीं पर मर मिटते है

जाये जहाँ भी हर पल हर चहेरे में सिर्फ तुझे ढूंढे मेरी नजर ,
मिल जाती राहे हमारी भी ,यक़ीनन दुआएं काबुल होती अगर.

जस्बात इतने गहरे है की जुदा है फिर भी याद बन लौट आते है.
किसी से बयां नहीं करते मगर उसकी कमी से अधूरे हो जाते है




Please Login to rate it.




How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017