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Kuchh ankahi si baten / कुछ अनकही सी बातें

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24 -Nov-2017 shalu L. Love Poem 0 Comments  223 Views
Kuchh ankahi si baten / कुछ अनकही सी बातें

कुछ अनकही सी बातें

कहीं शाम किसी की याद में, हसीं नग्में गुनगुनाती है,
रोने लगता है दिल, जब बात जुबां पर आके रुक जाती है,

कहने को तो बातें है हजार मगर, शुरुवात कहाँ से करें हम ,
भूल जाते है सब कुछ, जब भी ख्याल आपका करते है हम.

चाहत है या कोई मुश्किल उलझन में जिसकी कही खो जाते है
अपनी किसी अदा पर नहीं बस उसकी एक हसीं पर मर मिटते है

जाये जहाँ भी हर पल हर चहेरे में सिर्फ तुझे ढूंढे मेरी नजर ,
मिल जाती राहे हमारी भी ,यक़ीनन दुआएं काबुल होती अगर.

जस्बात इतने गहरे है की जुदा है फिर भी याद बन लौट आते है.
किसी से बयां नहीं करते मगर उसकी कमी से अधूरे हो जाते है




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