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कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो

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02 -Feb-2021 Dr. Archana Tirkey Nature Poem 2 Comments  441 Views
कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो

दूर सागर से आर्द्र हवा आई है
उमड़- घुमड़ कर आए काले बादल
बरखा रिमझिम -रिमझिम स्नेह बूँदें बरसा रही
धरा के कण -कण को सींचती
नव जीवन का संचार कर रही
मेघ आच्छादित नभ को दृष्टि उठा कर देख लो
कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो
यह धीरे से अपने हाथ बढ़ाती है
छोटी-छोटी खुशियों की पोटली खोलती
और होठों पर मुस्कराहट खींच जाती है |

प्रकृति जब धीरे से मुट्ठी खोलती है
बिखर जाते हैं चहुँ ओर कई रंग
बंद कली पंखुड़ियां खोल हॅंस पड़ती
उड़ आती रंग -बिरंगी तितलियों की टोली
मिठास घोल जाती पंछियों की मधुर बोली
मोहक इस दृश्य को दृष्टि उठा कर देख लो
कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो
यह धीरे से अपने हाथ बढ़ाती है
छोटी-छोटी खुशियों की पोटली खोलती
और होठों पर मुस्कराहट खींच जाती है |

पत्र विहीन शाख फैला पुराना वृक्ष खड़ा है
उपवन में फलते -फूलते वनस्पति मध्य
पर है न वंचित,चहचहाते पंछी करते मनमानी
ऊँची -ऊँची फुनगी को छूने की होड़ लगती
उड़ान भर प्रफुल्लित लौटे आते सूखी शाखाओं पर
आहत मन तज कर दृष्टि उठा कर देख लो
कुछ क्षण प्रकृति से जुड़ कर देख लो
यह धीरे से अपने हाथ बढ़ाती है
छोटी-छोटी खुशियों की पोटली खोलती
और होठों पर मुस्कराहट खींच जाती है |



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2 More responses

  • poemocean logo
    Bishwasi Hemrom (Guest)
    Commented on 06-February-2021

    बहुत सुंदर कविता, प्रकृति में निहित सुंदरता एवं जीवन को
    मनमोहक तरीके से बयां करती कविता.

  • poemocean logo
    सिकंदर राम (Guest)
    Commented on 03-February-2021

    प्रकृति को समर्पित किया कविता प्रकृति की गोद में ही हम सब पले बढ़े हैं आज जब भागदौड़ की जिंदगी में इंसान थक जाता है तो फिर से प्रकृति की ओर निहारता और निश्चय ही उसके जीवन में नई खुशियां नई उमंग नई उत्साह आ जाता है प्रकृति के हर घटा को बयान करती या कविता अत्यंत ही भाव विभोर से परिपूर्ण है। शुभकामनाओं सहित सादर प्रणाम। .

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