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कुछ एहसास...

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12 -Jun-2018 vijay sethiya Love Poem 0 Comments  138 Views
vijay sethiya

कुछ एहसास...
कुछ एहसास है
जो लफ्ज़ मांग रहे है
जिनके जिन्दा होने से
मैं भी जिन्दा हूँ|

कुछ एहसास है
जो दिल में दबे है
जिनकी ख़ामोशी से
मैं बहुत खफा हूँ|

कुछ एहसास है
जो उसके दिल से
मेरे दिल में आने को
बेताब हो रहे है|

कुछ एहसास है
जो आज भी मेरी
तन्हाई में मुझे
रुलाने लगते है||




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