Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Kuchh to Hai Dosh

0
30 -Nov-2016 Rajesh Deshpremi Miscellaneous Poems 0 Comments  712 Views
Rajesh Deshpremi

कल तक तुम थे मसीहा, प्रेरणा के स्रोत
आज करते हैं सब घृणा, कुछ तो है दोष।

लोगों ने बड़े विश्वास से सौंपा था बागडोर
विश्वास आज टूट गया, कुछ तो है दोष ।

तुम्हारी बातों को मानते थे पत्थर की लकीर
आज लोग उठा रहे अंगुली, कुछ तो है दोष ।

जब भी मिलते, करते हो लोगों की बुराई
लोग देख बदल रहे राह, कुछ तो है दोष।

बिना मतलब तुम डालते नहीं किसी को घास
लोग अब तुमसे लगे हैं कटने, कुछ तो है दोष ।

लोभ - लालच से परे नहीं कोई इस दुनियां में
लोग तुम्हें स्वार्थी कहने लगे , कुछ तो है दोष।

संकट में चार हाथ नहीं बढ़े मदद को आगे
लोग दूर से देख रहे तमाशा, कुछ तो है दोष।

बाप के समय दुकान में लगता था मेला
आज ग्राहक दिखते नहीं, कुछ तो हैं दोष।

कल तक बेधड़क आते - जाते थे हर घर
लोग दरवाजे से रहे लौटा, कुछ तो है दोष।

जब तक रहा साख, नाम पर मिलता था समान
आज झोला लौटा रहे दुकानदार, कुछ तो है दोष ।

Kuchh to Hai Dosh


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017