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कुछ यादें - कुछ सपने

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06 -Oct-2017 Sachin Om Gupta Memories Poems 0 Comments  735 Views
Sachin Om Gupta

" कुछ यादें - कुछ सपने "

१ ." बस वही यादें "

यादें एक सरल शब्द है,
केवल जहन की बातें या तकलीफें हैं यादें,
कुछ बातें, कुछ मुलाकातें और फिर यादें |
मिलना और मिल के बिछड़ना ,
तस्वीरें देख के आँसू का फिसलना
और रह जानी हैं तो बस क्या, यादें
बस वही यादें...बस वही यादें ...


२ ." जिन्दगी की पहेली बड़ी उलझी सी है "

जिंदगी की पहेली बड़ी उलझी सी है,
सोचता हूँ...
सुबह उठूँ ,मस्ती करूँ
नदियाँ और झरने देखूँ
कुछ मन की उलझनों को पन्नों पर लिख सकूँ,
इस खुलें आसमान को छू सकूँ
इस दुनिया की खूबसूरती को महसूस कर सकूँ
नई ऊँचाइयों की डगर को छू सकूँ,
कुछ सपनें बुनूँ और उन्हें जी सकूँ
पर जीवन की उलझनों के आगे किसकी चलती है,
जिंदगी की पहेली बड़ी उलझी सी है |
जिंदगी की पहेली बड़ी उलझी सी है |

धन्यवाद् ...
(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)



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