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Kuchh Yog Bhi Kar Lo

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21 -Jun-2016 Binod Kumar Social Events Poems 0 Comments  526 Views
Kuchh Yog Bhi Kar Lo

बनो मत आलसी अब तुम,
जरा कुछ योग भी कर लो।
अगर जो हो सके तुझसे,
समय का भोग तुम कर लो।
सबेरे में उठो नितदिन,
टहलना भी जरूरी है।
अगर सेहत नहीं अच्छी,
अकड़ना तो गरूरी है।
कहीं ऐसा नहीं हो फिर,
खुदी में रोग तुम कर लो।
अगर जो हो सके तुझसे,
समय का भोग तुम कर लो।
कभी भी सोचना मन में,
जरूरी बात ये कितनी।
मजे की बात है समझो,
करो ना तर्क अब इतनी।
नहीं कोई जमाने में,
सदा उपयोग तुम कर लो
अगर जो हो सके तुझसे,
समय का भोफ तुम कर लो।
करोगे भ्रामरी जब तू,
तुझे तो लाभ हीं होगा।
मिटेंगे कष्ट सब तेरे,
नहीं संताप तब होगा।
सहारा योग का लेकर,
सुखद संयोग तुम कर लो।
अगर जो हो सके तुझसे,
समय का भोग तुम कर लो।



Dedicated to
International Yoga Day

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