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कुदरत की सीख

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Kudrat Ki Seekh : Here is one of the best hindi poem on nature's teachings or What lessons nature teaches us or Kudrat ki seekh. This poem tell us the lessons what all natural things like sea, ocean, sun, rivers, birds, mountains and trees teaches us. If we follow teaching of these natural things then we will definitely live a happy and satisfied life.

14 -Dec-2017 Suresh Chandra Sarwahara Nature Poem 0 Comments  2,663 Views
Suresh Chandra Sarwahara

लहराता सागर कहता है
उतरो तुम पाने को मोती,
पाँव भीगने से जो डरते
उनकी जीत कभी ना होती।
कहती हमसे बहती नदिया
तुम भी चलते रहो निरंतर,
थक बैठे यदि बीच राह तो
बन जाओगे मैले पोखर।
ऊँचे पर्वत यह कहते हैं
तुम भी चढ़ो शिखर को पाने,
खड़े ताकते जो नीचे से
पड़ते उनको स्वप्न गँवाने।
कहते पेड़ सहन कर आतप
दो औरों को शीतल छाया,
सफल उसी का जीना जग में
कष्ट अन्य के जो हर पाया।
उड़ते उड़ते बोला पंछी
मुक्त गगन में फैला पाँखें,
भूख भली है आजादी की
व्यर्थ कैद की स्वर्ण - सलाखें।
हवा कह रही चलते चलते
अपना अपना काम करें सब,
पूजा समझ कर्म जो करता
उसे थकावट होती है कब।
कुदरत की सारी ही चीजें
कुछ ना कुछ हमको सिखलाती,
अगर सीख इनकी हम सुन लें
कटे जिन्दगी हँसती गाती।
*****
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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