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क्या बुरा काम किया ?

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15 -Mar-2019 सुमित.शीतल Human Being Poems 1 Comments  270 Views
सुमित.शीतल

कविता: क्या बुरा काम किया ?
हमने रोते हुए को हंसाने का प्रयास किया,
तो ये नेक काम करके क्या बुरा काम किया।
नफरत ही जिनका दीन-ईमान था,
उनको प्यार करना सिखाकर क्या बुरा काम किया।
ऐसे तो पहले भी मर-मर कर जीते थे कुछ लोग,
उनको हिम्मत से जीना सिखाने का प्रयास कर क्या बुरा किया।
कितनों का कलेजा छलनी-छलनी हो जाता था,
उनके गमों को बांटने का प्रयास कर क्या बुरा काम किया।
कुछ मासूम, नन्हे-मुन्ने गुड़ियां पाने को तरसे,
उनको साथ में गुड्डा भी दिलाकर क्या बुरा काम किया।
हर बात समझता है सबकुछ खोने के बाद इंसान,
उन्हे खोने से पहले पाया कैसे जाये सिखाया तो क्या बुरा काम किया।
कुछ लोग जो आसमां से खजूर में अटके,
उन्हे गिरने से पहले ही थामा तो क्या बुरा काम किया।
मौज दरिया जिनके हक में नही,
उन्हे कश्तियों में किनारा पार करा कर क्या बुरा काम किया।
कम से कम हम सब इतना तो कर ले यकीन,
ईश्वर के घर देर है अंधेर नही ये बताने का प्रयास कर क्या बुरा किया।
हमने रोते हुए को हंसाने का प्रयास किया,
तो ये नेक काम करके क्या बुरा काम किया।

समाप्त

सुमित.शीतल



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1 More responses

  • सुमित.शीतल
    सुमित.शीतल (Registered Member)
    Commented on 16-March-2019

    MRNG FRNDS, please if you like my poems, then please comment and share. thanks and tc..

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