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क्यो और किस बात का गुमान है तुझमे

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20 -Jul-2019 Vikash Varnval Human Being Poems 1 Comments  1,106 Views
क्यो और किस बात का गुमान है तुझमे

क्यो और किस बात का गुमान है तुझमे
मत भूल, किसी और की दी हुई जान है तुझमे

डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेशन ये सब तूने कर लिया
इंसानियत का भी पाठ है, क्या तूने इसे पढ़ लिया?

पर्सनॅलिटी डिव्ल्पमेंट, मॅनेज्मेंट जाने क्या क्या लोग पढ़ रहे है
दोस्ती और खून के रिश्तो को ताख पे रख, मैं मैं कर लड़ रहे है

सुबह शाम पैसे का नशा-ए-जाम है तुझमे
मत भूल, किसी और की दी हुई जान है तुझमे

अब भी समय है मानव सेवा तू सिख ले
इंसानियत क्या चीज़ है इस ज्ञान की तू भीख ले

धन जितनी मर्ज़ी कमा ले, बंदा खाली हाथ जाता है
ये सत्य है, कि आदमी ही आदमी के काम आता है

भलाई करता जा, फिर देख भगवान है तुझमे
मत भूल, किसी और की दी हुई जान है तुझमे

यहा की रेटिंग के चक्कर मे वहा की रेटिंग ना जाया कर
दूसरो के अच्छे काम को अपना गिना, क्रेडिट ना चुराया कर

मेहनत कर ग़लती से सिख, जग को अब तू जीत ले
फिर सफलता वाली गाड़ी हे, और आगे की तू सीट ले

रौशन कर दे नाम की मा बाप का अभिमान है तुझमे
मत भूल, की किसी और की दी हुई जान है तुझमे

By- Vikash Varnval



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1 More responses

  • poemocean logo
    Vicky (Guest)
    Commented on 25-July-2019

    Its a good read, dedicated to modern world and corporate.

    Loved it..

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