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लक्ष्य मंजिल

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09 -Oct-2021 Kumar Ashish Dream Poems 0 Comments  27 Views
लक्ष्य  मंजिल

मंजिल तुम्हें गर जो पानी हो
करो निर्धारित लक्ष्य को तुम
दृष्टि गड़ा दो लक्ष्य पे ज्योंही
कर निश्चय पग बढ़ा दो तुम

फूलों के संग में ही कांटे होते
कांटो संग में ही ख़ुशबू होती
पास ख़ुशबू तक गर जाना हैं
तो कांटो पर चल जाना है

दीपक के संग ज्योति होती
ज्योति के संग अंगारे होते
अंधकार गर है मिटाना तो
ज्योति जस जल जाना है

गर रौशन किस्मत करनी है
दीपक जस तो जलना होगा
मंजिल जो गर पानी हो तो
कर्म- पथ पर तो चलना होगा

देख लक्ष्य फिर साध निशाना
मेहनत का तू बाण चला दे
श्रम सागर में लगा ले गोता
जीवन स्वप्न के मोती पा ले

राह में तेरी कंकड़ भी होंगे
बिच-बिच पत्थर आजायेंगे
दृढ़ शक्ति मज़बूत तू रखना
पग हिमालय तब चढ जायेगे

सत्य कर्म पथ, गर चलेगा तू तो
मुस्किल राहें सब मिट जायेगी
चूमेगी कामयाबी कदम तुम्हारे
मंजिल खुद ही तुम्हें बुलायेगी



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