Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कब तक

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22 -Jun-2021 राजेश्वरी पंत जोशी Life Poem 0 Comments  30 Views
कब तक

कब तक कब तक बाँधोगे बाँध, मन की नदिया के धारों पर. टूट जायेंगी सभी दीवारें, नदिया को तो बहना है. कब तक रोकोगे तुम, रोशनी को चिनी दीवारों से. मन के रोशनदान खुलेंगे, उजालों को तो झरना है. कब तक दोगे पहरे सपनों पर, कब तक हा

कुछ पल की ये जिंदगानी !

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21 -Jun-2021 Hanuman Gope Life Poem 0 Comments  61 Views
कुछ पल की ये जिंदगानी !

कुछ पल की ये जिंदगानी, सुख दुख से भरी रवानी। माटी के इस संसार में, छल कपट के बाज़ार में, हार कर पड़ी सबको बितानी। कुछ पल की ये जिंदगानी। पैसा पैसा पैसा करता है, मनुष्य आज पैसे पर मरता है। रिश्तों का अब ध्यान नहीं, ईश्

आखिर इंसान क्या करे ?

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21 -Jun-2021 Hanuman Gope Life Poem 0 Comments  99 Views
आखिर इंसान क्या करे ?

आखिर इंसान क्या करे ? दुख से भरा हुआ यह जीवन, लगते समान बैरी और प्रीतम। भाई भाई रोटी के लिए लड़ते, मासूम बच्चे गरीबी में सड़ते। इन घावों को कोई मरहम क्या भरे, ऐसी हालत में आखिर इंसान क्या करे? आज मनुष्य जीता नहीं जलत

"जीवन-पथ" भाग-2

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11 -Jun-2021 rtripathi Life Poem 0 Comments  311 Views

"जीवन-पथ" भाग-2 'हमकों यूँ ही अल्फ़ाजो के समन्दर मे बह जाने दो न रोको ये पीर का पानी बह जानें दो मुझे इस जीवन-पथ पर बढ़ जाने दो।। मैं कंकड भू हूँ हरियाली मुझमें कैसे हो मैं प्रीत का मारा नीत का हारा इस जीवन-पथ पर हरियाल

मैने जीवन ढलते देखा है

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07 -Jun-2021 शिवाय कंडारी Life Poem 0 Comments  56 Views
मैने जीवन ढलते देखा है

मैने जीवन को ढलते देखा है मैने मायोस चहरे की बेबसी देखी है। किसी के साथी को तो किसी मा बाब को जिंदगी छुड़ कर जाते देखा है। मैने जीवन को ढलते देखा है। मैने हलात को बिगड़ते देखा है। मैने जीवन को ढलते देखा है। मैने मह

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