Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

जीवन भी है फूलों सा

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09 -May-2021 rtripathi Life Poem 0 Comments  133 Views
जीवन भी है फूलों सा

"जीवन भी है फूलों सा" कलियाँ खिल कर फूल बन गयी हाँ!मगर उनकी भी पंखुडियां बिखर गयी सपनो का संसार बना पल भर में वह भी बिखर गया तिनका-तिनका कर जोडा था घर अपना पल भर में वह भी बिखर गया अब थोडा सभंला था कि मजबूत इरादे कर लू

तुम से जुड़ चुका हूं

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07 -May-2021 Harpreet Ambalvee Life Poem 0 Comments  62 Views
तुम से जुड़ चुका हूं

मैं तुम से जुड़ चुका हूं, दुनिया में आया तेरी वजह से, दुनिया को समझा तेरी वजह से, तुम्हारी ही दिखाई ज़िन्दगी में मुड़ चुका हूं, मैं तुम से जुड़ चुका हूं, हज़ारो एब मुझमे है,मैं मानता हूं, लाख गलतियां होगीं,मैं जानता

ईश्वर सीधे सीधे समझ नहीं आता

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09 -Apr-2021 Vikram Life Poem 0 Comments  102 Views
ईश्वर सीधे सीधे समझ नहीं आता

बेटे को मैं समझाऊँ ईश्वर सीधे सीधे नहीं हो सकता घर से निकलते ही पथ पर जो मंदिर शिव का कुछ और कदम चलकर एक पेड़ पीपल का प्रतीक ब्रह्मा का वह नहीं करता ध्यान उनका न करता स्पर्श साथ चलते हुए उसके आज मुझे कहना पड़ा था उस

ऊब सा गया हूं मै इस ज़िन्दगी से

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04 -Apr-2021 LR Araman Life Poem 0 Comments  292 Views
ऊब सा गया हूं मै इस ज़िन्दगी से

ऊब सा गया हूं मै इस ज़िन्दगी से, फिर से आ गया हूं मै उसी कसमस में, जाऊं भी तो जाऊं कहां अब, हर वक़्त मुश्किल ही क्यों पाऊ मैं, हर बार इतनी परीक्षा लेता है क्यों तू, पास होऊ कैसे मेरी शक्ति छीन लेता है तू, मेरे सब सपने क्

आशा और निराशा

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31 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Life Poem 0 Comments  193 Views
आशा और निराशा

जीवन के हर क्षण में होती ,आशा और निराशा है। हँसते रहना आगे बढ़ना जीवन की परिभाषा है। जीवन के हर क्षण में होती, आशा और निराशा है। जिसने जीवन को जीना सीखा ,बस उसको ही चैन मिला। जो विपत्ति से नही लड़ा, वो ही हर पल बेचैन मिल

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