Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ये जिंदगी

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17 -May-2019 Saroj Life Poem 0 Comments  69 Views
ये जिंदगी

ये जिंदगी चलो हम फिर से कोई नई कहानी लिखते है, है जो अधूरी राहें उन राहो से फिर से गुजरते है, है भरे जिंदगी के कुछ पन्ने तो कुछ है खाली, चलो आज उनमे कोई इंद्रधनुषी सा रंग भरते है, यु तो खबर नहीं आने वाले कल की हमे कुछ, च

खान ज़िन्दगी।

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13 -May-2019 anuradha thalor Life Poem 0 Comments  89 Views
खान ज़िन्दगी।

आज मैं थक गई हूँ इस बेजार सी जिंदगी से लड़ते हुए हर बार तो गिरकर उठ जाती हूँ एक खाक सी उम्मीद करते हुए। कभी कभी सोचती हूँ ये सिलसिला कभी भी खत्म नहीं होगा कभी कभी सोचती हूँ शायद इससे बुरा कुछ नहीं होगा कभी कभी सोचती

लापता हूँ कब से मैं

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10 -May-2019 Maya Ramnath Mallah Life Poem 0 Comments  83 Views
लापता हूँ कब से मैं

राहो को मंजिल मिल गई सपनो को नींद मिल गई डूबते को किनारा मिल गया भटकते को सहारा मिल गया प्यासे को नीर मिल गई थके को शीतल मिल गई लापता हूँ कब से मैं ख्यालो में उल्झी जिंदगी के सवालो में सुलझे ही थे मेरे सवाल के फिर उल

माटी का माटी मैं रह गया

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06 -May-2019 DeepJangra Life Poem 0 Comments  78 Views
माटी का माटी मैं रह गया

किसकी नाव कौण खिवैया सब आपणे रंग मैं गाँवैं हैं माटी का माटी मैं रह गया घर के दुश्मन माटी लावैं हैं दे ज्यावैं हत्यार हाथ मैं वैं ठेकेदार फ़ेर जातां के रण मैं छोड़ कमेरयां नै ना बुझै तोड़ हालातां के साहूकारा कड तोड़ै

लफ़जां की उधार

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06 -May-2019 DeepJangra Life Poem 0 Comments  47 Views
लफ़जां की उधार

मुद्दतां तै मैं इन लफ़्जां की उधार कर रया था भीतरे भीतर शब्दां का ब्यौपार कर रया था जद इश्क़ जाग्या तो जीण का सलीका आया ऊँऐ मैं अँधेरयां मैं जिंदगी बेकार कर रया था दो ऐ डींग धरी थी इब्बे मुहोब्बत आली राहयां मैं बेरा

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