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Jeevan Ek Pyaali

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05 -Sep-2012 sukarma Thareja Life Poem 0 Comments  2,717 Views
sukarma Thareja

प्रत्येक मानव के भीतर होती है,
रिसेपटर के समान प्याली,
सीमित अनुपात में संचित,
करती-प्याली अनुभव जीवन के,
कई बसंतो में,
भरती प्याली ख़ुशी से,
कठिन समय में
भरती प्याली गमी से,
कभी भरती प्याली उमंग से,
कभी उत्साह से,
भरोसा कैसा ज़िन्दगी पर ?
इसकी राह कभी सूखी तो कभी बंजर,
कभी राह में कचरा है, तो कभी सड़न है,
कभी ज़िन्दगी कटी पतंग है ||२
जब इसमें चढ़ाव आये,
तो दोनों हाथों ने मदद दी
कभी जीवन शान्त है, कभी ठहरा हुआ,
कभी शान्ति का नशा मुझ पर गहरा गया,
संचित है मेरी प्याली में
कुलमिला कर अच्छे, बुरे,
खट्टे मिठे अनुभव,
सीमाएँ अवश्य है, पर कोई बाधा नहीं,
पूर्णत: सुविधापूवर्क हूँ मैं, सीमाओं के पर्यावरण में,
भली भांति संलग्न हूँ, अपने कार्यों में ||२
यह माना सीमित है, अनुभव मेरे,
अनुभव नहीं अनन्त मेरे,
हूँ एम्परफैक्ट, मैं बहुत जगह ,
स्वाभाविक हूँ, मैं जो भी हूँ,
कोसों दूर, दिखावे से,
पर करती कार्य मैं हिम्मत से ||२

शान्ति, आनन्द और परोपकार,
अनुभव विशेष मेरी जिन्दगी में,
फैलते चारों ओर बच्चों की,
किलकारियों की ध्वनि की तरह,
इन्हें संचित कर ओवर फ्लो करती मेरी प्याली ||२

यह भी सच है, मेरी
आर्थिक, मानसिक शारीरिक सीमांए हैं;
और रहेंगी भी,
पर मेरा विश्वास है,
कि मेरी प्याली ओवर फ्लो करती रहेगी,
जीवन में इसी विश्वास से,
मैं आगे बढ़ती रहूंगी ||2

डा० सुकर्मा थरेजा
क्राइस्ट चर्च कालेज
कानपुर



Dedicated to
to my dear younger sister sushma Arora

Dedication Summary
she is fascinated by artistic view of life and dedicated to her profession

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