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Zindagi Ka Safar / ज़िन्दगी का सफ़र

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22 -Jul-2013 Rooplata Maheshwari Life Poem 0 Comments  1,913 Views
Rooplata Maheshwari

ज़िन्दगी का सफ़र

ज़िन्दगी का सफ़र इतनी घडियो का क्यों ,

किसी को नहीं पता यह चलता है तो साँसे चलती है,

रुकता है तो साँसे थम जाती है क्यों ,

कितना लम्बा सफ़र कितना छोटा सफ़र ,

यह कोई नहीं जाना ,

किसी को अधूरी ज़िन्दगी तो किसी को पूरी ज़िन्दगी ,

ऐसा क्यों!!!

मिट्टी के रेले की तरह बह जाती है ज़िन्दगी क्यों ,

अपने जुदा हो जाते है क्यों,

क्यों साथ नहीं निभाते है क्यों,

पीछे मुड़कर देखते नहि क्यों,

आंसुओ की धराये छोड़ जाते है क्यों,

साथ न निभाना था तो साथ का वादा करते है क्यों,

ज़िन्दगी इन्तहान लेती है क्यों,

ऐसा क्यों की ज़िन्दगी के साथ खुशियाँ के सफ़र को जी सके,

मत रुला ऐ ज़िन्दगी जीने दे,

क्यों नहि रोकती सिलसिला जाने का,

कुछ पलो के लिए जीवन देती है तो क्यूँ गुजारे यह ज़िन्दगी ।



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