Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

Nobody

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23 -Nov-2018 vani lavakush Lonely Poems 0 Comments  36 Views
Nobody

Who can listen to your cries? The pillows? Who can listen to your lies? The walls? Who can hold you when you fall? The floor? Who can help you stand tall? Heels? Who can show you how to smile? Pets? Who is on your speed dial? Pizza? WHO can you see around you? Uh. Nobody? So, who do you have? Nobody.

अधीर

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28 -Sep-2018 अभिषेक आर्य Lonely Poems 0 Comments  162 Views
अधीर

धीर जब अधीर होकर शहर की भीड़ में कुचला जाता है , गाने , ताने और बहाने जब कानो को कर्कश लगाने लगते है , फ़ोन की घंटिया जब अट्ठास करती है, दिल और दिमाग जब मांस का लोंदा लगता है , चेहरें को कुरेदने वाले नख जब नाकामी की लकीरे

बिन तेरे - मैं ऐसा हूँ

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29 -Aug-2018 Mansoor Lonely Poems 0 Comments  138 Views
बिन तेरे - मैं ऐसा हूँ

बिन तेरे - मैं ऐसा हूँ जैसे ज़मीन - बिना हरियाली के जैसे पेड़ - बिना पत्तियों के जैसे मौसम - बिना खुशहाली के जैसे चाँद - बिना चाँदनी के जैसे फूल - बिना खुशबू के जैसे आँखें - बिना नज़ारों के जैसे ज़ुबान - बिना लफ्जों के जैसे द

मैं....

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मैं....

स्वयं से साक्षात्कार....!! चूंकि ‘स्‍व’ रूपी संज्ञा का ‘स्‍वयं’ सर्वनाम है और ‘मैं’ क्रिया-विशेषण है,अस्‍तु ‘स्‍व’-स्‍वयं-मैं शब्‍द पर्यायवाची है। स्‍वयं से साक्षात्‍कार ही स्‍वयं की खोज भी है, स्‍वयं की खोज सत्

यत / Yat

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01 -Aug-2018 Dp uday Sangit Lonely Poems 0 Comments  58 Views
यत / Yat




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