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Judai

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29 -Jun-2014 Manisha shukla Lonely Poems 1 Comments  1,264 Views
Manisha shukla

रास्ता देखते देखते थक गई आँखें मेरी
ना तू मिला, बस तेरी तन्हाई मिली
दिये तेरे गम मिले, दिये तेरे आँसू सही
बस अब बन गये जीने का सहारा यही,

तेरी मुस्कान अब जीने की आस हैं
बस तू और तू मेरी हर धड़कन की साँस हैं
देखना है कि कब तू समझ पायेगा
कब मुझे और मेरे प्यार को अपनायेगा,

चाहती हूँ मैं भी तुझसे दूर जाना
भूल जाऊं ऐसा हैं मन में ठाना
क्यूंकि उदास रहके ना अब जी पाऊंगी
बस यही तमन्ना और आस लेकर मार जाउंगी
लेकिन कब तू भी मेरे लिये इस तड़प से गुजरेगा
मेरे बिछडने के गम से रात भर नहीं सोयेंगे
और मेरी छोटी सी छोटी खुशी को अपना कह के रोयेगा

और तब तुझे मेरे सच्चे प्यार की कदर होगी
और मेरा प्यार ही तेरे हर मर्ज़ की दवा होगी
इसी बात पे एक नसीहत देना चाहूंगी
करले कदर सच्चे प्यार की, वरना जिन्दगी बेकार की
इसी अनमोल प्यार ने तो,चलाई जिन्दगी पूरे संसार की.



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1 More responses

  • Manish Guru
    Manish Guru (Registered Member)
    Commented on 10-July-2014

    हमसा ही हो जैसे तेरी जुदाई का किस्सा,
    लगता है जैसे हमें ये अब हमारा हिस्सा,
    बहुत हुआ उसे दुसरा मौका मत देना,
    खुद को फिर ऐसी सजा न देना.....

    :) I felt your poem so much.. thanks for sharing....

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