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Dupatta

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04 -Jul-2015 LALJEE THAKUR(Haffman) Love Poem 2 Comments  2,386 Views
LALJEE THAKUR(Haffman)

दुपट्टा

बर्फीली ठण्डी हवाओं से बचाता हूँ।
बरसात में बूंदों की दरिंदगी से बचाता हूँ।
जेठ की कड़क धुप से छुपाता हूँ।
वसंत की बहार में खुशियों से लहराता हूँ।

प्रेमियों के प्यार में भी घुल जाता हूँ।
चेहरे को ढक जन्नत की याद दिलाता हूँ।
बुरी नजर,बत्तमीज और छेड़खानी से बचाता हूँ।
तेरी खुबशुरती मैं दिल से सजाता हूँ।

जब वदन कट जाये या कोई दुर्घटना हो जाए तो मरहम भी करता हूँ।
मुझे पटक पटक कर धोओ या कस के निचोड़ो फिर भी प्यार करता हूँ।
चाहे तू कुछ भी कर ले अब तुझसे नहीं डरता हूँ।
मैं डरता हूँ तो बस तेरी बेवफाई से डरता हूँ।

आज मुझे वह जगह देती है जहाँ मेरी कोई जरुरत ही नहीं।
अब मुझे यह लगता है की अब मेरी कोई जरुरत ही नहीं।
कभी सिर में बांधकर तो कभी कमर में बांधकर मंच पर थिरकती है।
मैं तो बेशर्म हो चुका हूँ चाहे सिर में बांधो या कमर में मंच पर उतारो या बड़े शहर में।

क्या किया था मैंने जिसकी सजा मिल रही है।
क्या खामिया है मुझमे कि मुझसे वैर कर रही है।
जिस रंग का चाहो उस रन का मिल जाता हूँ।
प्यार से पसारो अगर तो वदन पर सुख जाता हूँ।

अपनी बूढी दादी की भी बात सुन क्योंकि वह भी कभी जवान थी।
सलवार सूट और दुपट्टा उसकी परी होने की पहचान थी।
बुरे नजरो की संख्या तब भी कम न थी।
पर मेरे कारण उन्हें थोडा भी गम न थी।

कभी बुजुर्गों ने बनवाया मुझे अपने प्रेमिकाओं की रक्षा के लिए।
वो खुश किस्मत थी और मैं भी खुश नसीब था।
आज प्रेमिकाओं ने मुझे हटाई अपने प्रेमियों के लिए।
अगर प्रेमी ही बत्तमीज है तो दुनिया क्या करे।

अरे मुझे हटाई तो सिसकता हूँ मैं कोने में फफकते सलवार सूट को क्यों हटाई।
पश्चिमी गोरी छोरी बनने का नशा लगी है तुझे।
पलभर में बतमीजों ने तेरी हंसी क्यों उड़ाई।
क्योंकि साड़ी दुनिया को बत्तमीज बस तूने ही बनाई।

घर में झगड़ती हो प्रेमी से लड़ती हो।
पलभर के झगड़ों से जीने से डर्टी हो।
गर्दन में बाँध मुझे और पलभर में मरती हो।
फिर इस कदर मुझे ही दुनिया में बदनाम करती हो।

॥लालजी ठाकुर दरभंगा बिहार॥

Dupatta


Dedicated to
सभी लड़कियों को

Dedication Summary
क्योंकि दुपट्टा लड़कियो की आन मान शान है इसे कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि यह दुपटा उसे विदेसी से अलग पहचान दिलाता है।बस मैंने तो सही लिखने की हिम्मत की है।

आपकी टिप्पणी मेरे लिए अनमोल और बहुमूलय है ।आपको ये पोस्ट पसंद आई तो भी ना आई तो भी,अपनी कीमती राय कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.आपके मशवरों से मुझे बेहतर से बेहतर लिखने का हौंसला मिलता है.

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2 More responses

  • poemocean logo
    Rohit (Guest)
    Commented on 18-March-2016

    Very nice word collection
    Apne hobby ko continue rakhiye jarur kuchh hasil hoga.

  • poemocean logo
    Amit (Guest)
    Commented on 12-July-2015

    Nice poem...

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