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Tujhe Rab Manta Hoo

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20 -Jan-2015 Dushyant Patel Love Poem 0 Comments  1,645 Views
Tujhe Rab Manta Hoo

तेरे हर असलियत जानता हूँ,
फिर भी तुझे रब मानता हूँ.
भूल जाता हूँ खुद को यदाकदा,
मगर हरपल तेरी चेहरा पहचानता हूँ.

बेशक तुमपे न होगी कोई असर,
फिर भी तुम्हे बेइम्तिहा चाहता हूँ.
तेरे ख्वाबो की चादर बुनता हूँ,
जहाँ तलक मेरे नजर जाता है,
एक तुझी को ढूंढ़ता – फिरता हूँ.
कभी ढूंढ़ना हो तो ढूंढ लेना,
तुम्हारे ही दिल में रहता हूँ.

तेरे राह ख़ुशी बिछाने के लिए,
हर गम सह के हँसता हूँ,
तू खेलती रही है मेरे दिल से,
फिर भी तुझे रब मानता हूँ.
तेरे प्यार में बन गया हूँ आवारा,
मगर तेरे पता नहीं भूलता हूँ.

तू आयेगी लौट कर उम्मीद है,
इसी इन्तिज़ार में अब-तक ज़िंदा हूँ.
कभी तो होगी मिलन सोचकर,
दरख़्त के निचे बैठ तेरे राह तकता हूँ.

तेरे नाम की माला हर पहर जपता हूँ,
तू आयेगी सोचकर सजता संवरता हूँ,
गुजरी हुई पल को याद कर,
कभी हँसता हूँ कभी रोता हूँ,
तेरे हर अतीत लम्हों को,
मै शायरी,ग़ज़ल में ढालता हूँ.

वो तितली कब आयेगी मेरे आँगन,
कही कोने में बैठ खुद से पूछता हूँ.
तन्हाई रात , सावन की बरसात में,
क्या करू तेरे बिन जलता हूँ.

मै कैसा पागल आशिक़ हूँ,
तेरे हर असलियत जानता हूँ,
फिर भी तुझे रब मानता हूँ

@@ दुष्यंत पटेल @@



Dedicated to
my love .....

Dedication Summary
love is greatest asset of my life

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