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Wo Lamhe

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03 -Jan-2015 Amita Magotra Love Poem 0 Comments  1,906 Views
Amita Magotra

आओ आज कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें
आओ आज कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें
अकेले - अकेले हम कई बार जीते हैं उन लम्हों को
आओ आज नियम बदलें , कायदा तोड़ें
कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें॥

आओ फिर से इक बार जियें वो पल
जब हम तुम पहले अजनबी थे ;
वो एक दूसरे को दूर से तकना
वो पास से मुँह घुमा कर , निकल जाना
वो किसी और से एक दूसरे की बातें सुनना
वो बात करने को होना, पर चुप रह जाना

आओ आज कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें
फिर अजनबी सिलसिले खत्म हुए
इक दूजे से मुस्कुराना शुरू हुए
दोस्तों को साथ शामिल कर , हम तुम
धीरे - धीरे फिर दोस्त हुए ॥

आओ आज कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें
वक़्त बना तब दुश्मन हमारा , इक दूजे को दे न पाते थे
सब के साथ होने से, बात न कोई कर पाते थे
फिर लम्हों को हमने, वक़्त से चुराना शुरू किया
सबसे नज़रें चुरा कर ,नज़र मिलाना शुरू किया ॥
न जाने नज़रों ने क्या जादू किया
हर वक़्त,हर जगह बस तेरी ही बातें पिया
चार ओर दोस्तों का भी वही हाल हुआ
मोहब्बत की जाने कैसी हवा चली
कि सबको ही पागल किया ॥
आज सब साथ हैं , वक़्त सबके पास है
पर साथ बैठे ढूंढते ,किसी तीसरे का साथ हैं ॥

आओ आज कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें
फिर वक़्त से उन लम्हों को चुराने की कोशिश करें
सब की नज़रें बचा कर, नज़रें मिलाने की कोशिश करें
आओ आज कुछ पुराने, वो लम्हें मिलकर याद करें



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