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माँ अनंत है!

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16 -Jan-2021 Parmanand kumar Mothers Day Poem 0 Comments  131 Views
Parmanand kumar

सुबह से देख रहा हूं कि मां को लेकर तमाम सोशल साइट्स पर मां की कृति को उजागर किया जा रहा है क्योंकि आज मातृ दिवस है और मैं भी यूं ही मां के बारे में कुछ सोच रहा था कीमा मैं तुझे कैसे आज तेरे श्रद्धा में कुछ समर्पित करू और मन ही मन सोचते-सोचते मेरे मन के अंतर्मन से मां के लिए कुछ अनमोल शब्द निकल पड़े हैं जिसे मैंने फेसबुक पर उकेरा है और आप लोगों के बीच समीक्षा के लिए प्रस्तुत कर रहा हूं सभी माताओं के लिए समर्पित है :---------

मां
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मां ,मां अनंत है अशेष है !
मां नहीं तो जग नहीं,
ब्रह्मांड की सारी खुशियां भी
अवशेष हैं. अवशेष है!

मां ,बहन की खुशियां है !
नई बहू की सास है ,साहस है!
आने वाले हर समस्या की ढाल है !
मां है तो जीवन अनमोल है!
मां नहीं तो जीवन कंगाल है !

मां ममता की मूर्ति पिता स्वरूप है!
मां बचपन की लोरी ,
और पिता की दुलारी है !
मां नहीं तो सृष्टि का ,
हर कण अधूरी है!

मां महाकाली और जगदंबा है!
मा ही सरस्वती ,दुर्गा और लक्ष्मी है!
मां से जगत निराली है
मां के कदमों में ब्रह्मा- विष्णु- महेश है!
मां के चरणों में अमरत्व का वरदान है!
या यूं समझ ले कि मा ही भगवान है!

मां का स्वरूप इस जगत में अद्वितीय है!
मां अपने पोते -पोतियो की दादी है,
रात में सोते वक्त परियों की कहानी है!
मां मां है तो अपनी झोली में ,
दुनिया की सारी खुशियां है!
मां मां नहीं तो यह जग सुना सुना है !

मां है तो बच्चे की किताब है कॉपी है !
मां है तो घर की शान- ए-शौकत है !
मां है तो बच्चों की महत्वाकांक्षा है !
मां है तो बच्चों की आंतरिक बुलंदी है !
मां मां है तो बच्चों के थाली का भोजन है!
मां मां है तो बच्चों के माथे का तिलक है!
मां कौमा नहीं , सेमी कौमा नही ;
मां है तो संपूर्ण .... पूर्णविराम है !

परमानंद कुमार
शिक्षक ..अंधराठाढ़ी

माँ अनंत है!


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