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Maa Ganga Ek Nirmal Dhara Hai

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21 -Nov-2016 कवि अतुल इलाहाबादी Environment Poems 0 Comments  1,871 Views
Maa Ganga Ek Nirmal Dhara Hai

माँ गँगा इक निर्मल धारा है ,
हमारे पूर्वजो ने स्वर्ग से उतारा है।।
माँ गँगा के लिए हर कोई प्यारा है।।
माँ गंगा के लिए हो जिसमे सच्ची आस्था ,
वही निभाता है पूरजो की प्रथा ।।
माँ की तरहा हो निर्मल ह्रदय ,
पावन हो जाये जग सारा ,
महीमामय माँ मिले सबको तेरा सहारा।।
अतुल पर भी माँ हो सदा कृपा ,
मै भी हूँ इक दास तुमहारा।।
माँ मैने सदा तुमको पुकारा,
मुझको भी मिले सदा तेरा सहारा ।।
आयी जब बिपदा मुझपर,
मैने तेरा राह निहारा ।।
जय माँ गँगा।।।



Dedicated to
River Ganga

Dedication Summary
We should keep our mother Ganga clean.

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